शनिवार, 4 जुलाई 2020

चर्चा सिर्फ़ पहुंच की होती है

चर्चा सिर्फ पहुंच की होती है
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किसी नगर में प्रवेश के एक से अधिक रास्ते हैं
नगर से जाने के भी
अमूमन उतने ही
लैटिन या अरबी भाषा में घुसने का
सही रास्ता नहीं पता होता जिन्हें
तो वे अंग्रेजी वाले
पिछले रास्ते से घुस जाते थे

यह कहना सही नहीं होगा
कि वह रास्ता नहीं है
गोया बहुत चलताऊ रास्ता था

धर्मनिरपेक्षता के खेमे के प्रामाणिक लोग सांप्रदायिकता के बाड़े में
घुसने की अंग्रेजी जानते हैं
ऐसी अंग्रेजी
जो गुम हो जाती है ख़ुद ब ख़ुद
गुफा तक पहुंचा कर

चर्चा सिर्फ पहुंच की होती है
पहुंचने वालों की तो हैसियत होती है